Sunday, June 6, 2021

Text Editor in Hindi

Text Editors in Hindi

Text Editor

यह एक सॉफ्टवेयर है जो नई प्लेन टेक्स्ट फाइल बनाने, पहले से बनी फाइल में कुछ ऐड करने व डिलीट करने की सुविधा देता है टेक्स्ट एडिटर टेक्स्ट में फॉर्मेट इन नहीं जोड़ते हैं इसका प्रयोग प्रोग्रामिंग के क्षेत्र में टेक्स्ट एडिटर सोर्स कोड एडिटर को रिफर करता है।


Text Editor एक प्रकार का टूल है। जिसका उपयोग प्लेन टेक्स्ट फाइल को एडिट करने में करते है।

Example - Notepad, Notepad++, Sublime, Text Edit, Visual Studio, Textmate, Atom, Vim, Dreamweaver, etc.


Notepad - नोटपैड माइक्रोसॉफ्ट विंडोज के लिए एक सिंपल टेक्स्ट एडिटर और बेसिक टेक्स्ट एडिटिंग प्रोग्राम है। जो कंप्यूटर उपयोगकर्ताओं को डॉक्यूमेंट बनाने की सुविधा देता है। इसे माइक्रोसॉफ्ट इनकॉरपोरेशन द्वारा डिवेलप किया है। ये एक यूटिलिटी सॉफ्टवेयर होता है, जो कि सिस्टम सॉफ्टवेयर को इंस्टॉल करते समय स्वतः इंस्टॉल हो जाता है।


Notepad++ 

  • Notepad++ एक प्रकार का फ्रीवेयर टेक्स्ट व सोर्स कोड एडिटर होता है। ये एडिटर केवल विंडोज प्लेटफार्म को सपोर्ट करता है।

  • पावरफुल एडिटिंग कंपोनेंट scintilla पर आधारित NOTEPAD++, C++ में लिखा गया है।

  • यह Win32 API और STL का प्रयोग किया जाता है।

  • GNU के तहत इसका प्रयोग किया जा सकता है।

  • Notepad++ को हमारे टेलीग्राम चैनल से डाउनलोड कर सकते है।


Advantages

  • Syntax Highlighting

  • Auto Completion for programming, script & Markup Language

  • Macros

  • Auto Save

  • Finding & Replacing String of Text with Regular Expression

  • Simultaneous Editing

  • Tabbed Document Interface

Responsive Web Design in Hindi - Sunrise Computer

Responsive Web Design

Responsive Web Design

यह एक प्रकार का वेब डिजाइनिंग एप्रोच है जिसका प्रयोग वेबसाइट को अलग अलग डिवाइस (जैसे - लैपटॉप, टेबलेट, मोबाइल, आदि) में वेबसाइट के लेआउट को डिवाइस के अनुसार ऑटो एडजस्ट करने के लिए इस एप्रोच का प्रयोग किया जाता है।

इस Responsive Web Design शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग Ethan Marcotte ने किया था। इनके अनुसार responsive web design के तीन भाग निम्न होते है -

  1. Fluid Grid - इसमें fluid width column, fixed gutter व fixed margin होती है। जिसमे स्क्रीन साइज के आधार पर column grow या shrink हो जाता है।

  2. Fluid Image - Image की hieght, width px में सेट करने से कभी कभी इमेज स्क्रीन पर प्रॉपर डिस्प्ले नही होती है। अतः responsive web design के लिए इमेज को responsive बनाना जरूरी होता है।

  3. Media Queries - स्क्रीन resolution व Orientation के आधार पर layout customize कर सकती है।

Websites & Its Types in Hindi

Websites & Its Types in Hindi

Website - वेबसाइट कई सारे वेब पेज का कलेक्शन होती है। जिसमे प्रत्येक वेब पेज आपस में हाइपरलिंक्ड होते है और सभी वेब पेज एक ही डोमेन को रिफर करते है।

Web Page - वेबपेज एक इलेक्ट्रॉनिक पेज होता है। जिसमे एचटीएमएल, सीएसएस और अन्य प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का प्रयोग करके बनाया जाता है। इसमें टेक्स्ट जानकारी के साथ-साथ इमेज, ऑडियो, वीडियो और अन्य हाइपरलिंक भी शामिल होते है।


Working of Websites

  • वेबसाइट किसी वेब सर्वर पर पोस्ट की जाती है और उसका एक आईपी एड्रेस होता है। जिसके द्वारा उस वेबसाइट को ग्लोबली एक्सेस किया जा सकता है।

  • जब यूजर ब्राउज़र पर वेबसाइट का डोमेन नेम सर्च करता है और ब्राउज़र ip-address के द्वारा सर्वर से जुड़ता है। अतः डोमिन सर्वर डोमेन नेम (URL) को एड्रेस रिजॉल्यूशन प्रोटोकॉल के द्वारा आईपी एड्रेस में बदल देता है।

  • आईपी एड्रेस प्राप्त हो जाने के बाद ब्राउज़र सर्वर से एचटीटीपी रिक्वेस्ट करता है और डिस्कनेक्ट हो जाता है फिर रिस्पांस का इंतजार करता है।

  • सरवर यूजर की रिक्वेस्ट को प्रोसेस करने के बाद दुबारा कनेक्शन स्थापित करता है। फिर क्लाइंट प्रोग्राम पर वेबसाइट (रिजल्ट) खुल जाता है।


Types of Websites

  1. Static Website - स्टैटिक वेबसाइट उनका तेजस का कलेक्शन होता है जिनका कंटेंट फिक्स होता है। प्रत्येक यूजर के लिए एक जैसा रहता है। स्टैटिक वेबसाइट को डिजाइन करना आसान है और इसे बनाने में लागत भी बहुत कम आती है।

  2. Dynamic Website - यह वेबसाइट उन वेबपेज का कलेक्शन होता है। जिसका कंटेंट समय समय पर परिवर्तित होता रहता है। इस वेबसाइट को बनाने के लिए फ्रंट एंड और बैक एंड टेक्नोलॉजी का भी प्रयोग किया जाता है।

Front End Technology

फ्रंट एंड वेबसाइट का वह भाग होता है जिससे यूजर ब्राउज़र पर देख सकता है व डायरेक्टली उसे इंटरेक्ट कर सकता है। अर्थात इस टेक्नोलॉजी के द्वारा ब्राउज़र पर प्रोग्राम को कंट्रोल वमैनेज किया जा सकता है। इसको निर्मित करने में मुख्य रूप से एचटीएमएल, जावास्क्रिप्ट तथा सीएसएस प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का प्रयोग हुआ है।


Back End Technology

बैक एंड वेबसाइट का वह भाग होता है जिसे यूजर देख नही सकता है। वेबसाइट के बैक एंड को वेबसाइट की बैकबोन भी माना जाता है, क्योंकि बैक एंड में सर्वर, एप्लीकेशन, व डेटाबेस होता है। बैक एंड और फ्रंट एंड आपस में कम्युनिकेट करता रहता है और डाटा सेंड करता रहता है जो कि वेबपेज पर प्रदर्शित होता है।


Saturday, June 5, 2021

Introduction to Web Design in Hindi

'O' Level (M2-R5)

Chapter-01 (Introduction to Web Design)

Network - कंप्यूटर नेटवर्क का एक ऐसा ग्रुप होता है। जो आपस में इस प्रकार जुड़े रहते हैं कि वह इंफॉर्मेशन को शेयर कर सकें और आपस में कम्युनिकेट कर सके क्योंकि नेटवर्क का मुख्य उद्देश्य कम्युनिकेशन करना होता है। जब हम नेटवर्क में जुड़े कंप्यूटर के साथ कम्युनिकेशन करते समय नियमों का पालन करते हैं तो उन्हें प्रोटोकॉल कहा जाता है।

Internet - इंटरनेट को नेटवर्कों का नेटवर्क होता है। जिसमें कि नेटवर्किंग डिवाइस का प्रयोग करके इंफॉर्मेशन को शेयर तथा कम्युनिकेशन की जा सकती है। इंटरनेट नेटवर्क स्टाइलिश करने के लिए टीसीपी / आईपी, ओ.एस.आई.मॉडल और पैकेट स्विचिंग का प्रयोग किया जाता है।


WWW - WWW का पूरा नाम वर्ल्ड वाइड वेब होता है जिसे W3 या वेब के नाम से भी जानते हैं। इसे TIM BERNERS LEE द्वारा 1989 में बनाया गया था। WWW एक इंटरनेट पर एक इंफॉर्मेशन सिस्टम होता है। WWW के द्वारा वेब में उपलब्ध किसी भी रिसोर्स को एक्सेस किया जा सकता है।इंटरनेट और WWW एक समान नहीं है क्योंकि इंटरनेट इंटरकनेक्टेड कंप्यूटर नेटवर्क का ग्लोबल सिस्टम होता है, जबकि WWW, Hyperlink Documents के साथ साथ another रिसोर्सेज का कलेक्शन होता है। WWW सम्पूर्ण रूप से इंटरनेट पर निर्भर है।


BASIC TERMINOLOGY OF INTERNET

  1. ISP - आईएसपी का पूरा नाम इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर होता है यह टेलीफोन कंपनी होती है जो इंटरनेट से कनेक्ट होने की सुविधा प्रदान करती है भारत में सर्वप्रथम इंटरनेट की सुविधा VSNL (Videsh Sanchar Nigam Limited) द्वारा संचालित की गई थी। Jio, Airtel, VI, BSNL, ISP के प्रमुख उदाहरण है।

  2. DNS - इसका पूरा नाम डोमेन नेम सिस्टम होता है जो ip-address को कैरेक्टर स्ट्रिंग में चेंज करता है जिससे यूजर को वेबसाइट का आईपी एड्रेस नहीं याद रखना पड़ता है। 

  3. HTTP - इसका पूरा नाम हाइपरटेक्स्ट ट्रांसफर प्रोटोकोल होता है जोकि टीसीपी मॉडल में पोर्ट नंबर 80 पर कार्य करता है। यह द ब्राउज़र को सर्वर से कनेक्शन इस्टैबलिश्ड कराने के लिए व इंफॉर्मेशन को एक्सचेंज करने के लिए सुविधा प्रदान करता है।

  4. MODEM - इसका पूरा नाम Modulator - Demodulator होता है। यह एक टेलीफोन लाइन के माध्यम से कंप्यूटर को इंटरनेट से कनेक्ट करने की सुविधा देती है यह डिजिटल सिग्नल को एनालॉग एवं एनालॉग सिग्नल को डिजिटल में परिवर्तित करती है।

  5. HTML - इसका पूरा नाम हाईपर टेक्स्ट मार्कअप लैंग्वेज होता है। जिसका प्रयोग वेब पेज को बनाने के लिए किया जाता है।

  6. Hyper - Link - Website के एक पेज से दूसरे पेज पर जाने के लिए या किसी अन्य वेबसाइट को अपनी वेबसाइट पर लिंक करने के लिए प्रयोग किया जाता है।

  7. Home Page - किसी वेबसाइट का वह फ्रंट पेज होता है। जब हम उस वेबसाइट को ओपन करते हैं तो सर्वप्रथम जो पहला पेज दिखाई देता है, उसे होमपेज कहा जाता है। इसे इंडेक्स पेज के नाम से भी जानते है।

  8. Downloading - इंटरनेट के माध्यम से सर्वर पर स्टोर किसी भी फाइल को अपने कंप्यूटर या लोकल कंप्यूटर में सेव करने की प्रक्रिया को डाउनलोडिंग कहते हैं।

  9. Uploading - इंटरनेट के माध्यम से लोकल कंप्यूटर या क्लाइंट कंप्यूटर के द्वारा सर्वर पर किसी भी फाइल को स्टोर कराने की प्रक्रिया को अपलोडिंग कहा जाता है।

  10. Cookie - जब यूजर वेब ब्राउज़र के माध्यम से किसी वेबसाइट को ओपन करता है तो वेब ब्राउज़र बाई डिफॉल्ट उस वेबसाइट के रिगार्डिंग कुछ इंफॉर्मेशन स्टोर कर लेता है जिसमें उस वेबसाइट में कितने वेबपेज होते हैं और फॉर्म में डाटा क्या भरा गया है एड्रेस क्या है और स्टेट फुल इनफार्मेशन रहती है जिसे इंटरनेट की टर्मिनोलॉजी में Cookie कहते हैं। इसे http cookie, web cookie, browser cookie, internet cookie भी कहते है।

  11. Surfing - WWW के द्वारा एक वेबपेज से दूसरे वेब पेज पर जाने की प्रक्रिया को सर्फिंग कहते है।

  12. Bandwidth - निश्चित समय में ट्रांसफर होने वाले डाटा को बैंडविथ कहते है।




Wednesday, June 2, 2021

Difference Between IPv4 & IPv6 (In Hindi) - Sunrise Computer

 DIFFERENCE BETWEEN IPv4 & IPv6 

IPv4

IPv6

इसमें 32 बिट्स लम्बाई का एड्रेस होता है।

इसमें 128 बिट्स लम्बाई का एड्रेस होता है।

IPv4 एड्रेस एक बाइनरी संख्या होती है जिसे डेसीमल में प्रदर्शित किया जाता है।

IPv6 एड्रेस भी बाइनरी संख्या होती है जिसे हेक्साडेसीमल में प्रदर्शित किया जाता है।

इसमें Fragmentation को Sender तथा Forwarding Routers दोनों के द्वारा Perform किया जाता है।

इसमें Fragmentation को केवल Sender के द्वारा परफॉर्म किया जाता है।

यह मोबाइल नेटवर्क के लिए थोडा कम अनुकूल है।

यह मोबाइल नेटवर्क के लिए ज्यादा अनुकूल है।

इसमें Header Field की संख्या 12 है।

इसमें Header Field की संख्या 8 है।

इसकी शुरुआत 1981 में हुई थी।

इसकी शुरुआत 1998 में हुई थी।

यह एक Numeric Address है जिसमें 4 Fields होते है और ये फील्ड dot (.) के द्वारा Separate (अलग) रहते हैं।

यह एक Alphanumeric Address है जिसमें 8 Fields होते है और ये फ़ील्ड्स colon (:) के द्वारा Separate रहते हैं।

इसके पास IP Address की 5 Class होती हैं। – Class A, Class B, Class C, Class D, Class E.

इसके पास IP Address की कोई भी Class नहीं होती।

इसके पास सिमित (Limited) संख्या में IP Address होते हैं।

इसके पास बहुत बड़ी संख्या में IP Address होते हैं।

यह VLSM (Virtual Length Subnet Mask) को सपोर्ट करता है।

यह VLSM को Support नही करता।

यह 4 Billion यूनिक Addresses को जनरेट करता है।

यह Undecillion यूनिक Addresses को जनरेट करता है।

IPv4 में, End to End Connection Integrity को प्राप्त नहीं किया जा सकता।

IPv6 में, End to End Connection Integrity को प्राप्त किया जा सकता है।

इसमें Checksum Field उपलब्ध होते हैं।

इसमें Checksum Field उपलब्ध नहीं रहते है।

यह Encryption और Authentication प्रदान नही करता।

यह Encryption और Authentication प्रदान करता है।

यह SNMP प्रोटोकॉल को Support करता है।

यह SNMP को सपोर्ट नहीं करता।

इसमें MAC Address को Map करने के लिए ARP (Address Resolution Protocol) का इस्तेमाल किया जाता है।

इसमें MAC Address को Map करने के लिए NDP (Neighbour Discover Protocol) का प्रयोग किया जाता है।

उदाहरण – 166.93.28.10

उदाहरण – 2001:0db8:0000:0000:0000:ff00:0042:7879



Thursday, May 27, 2021

Difference Between Sniffing & Spoofing - Sunrise Computers

 Difference Between Sniffing & Spoofing (In Hindi)

Sniffing 

Spoofing

इसमें Attacker, Traffic को Packet Sniffers के द्वारा Monitor और Collect करता है।

इसमें Attacker किसी दूसरे व्यक्ति के IP Address का प्रयोग करता है, जिसके वो अपने आप एक Legitimate (वैध) User दिखा सके।

यह एक Passive Attack होता है जो कि System को किसी प्रकार का नुकसान नहीं करता है।

यह एक Active Attack होता है जो कि System में खतरनाक Malicious Programs को Insert कर सकता है।

Sniffing को रोकने के लिए के लिए Encryption सबसे अच्छा तरीका है।

Spoofing को रोकने के लिए Digital Signature सबसे बेहतर तरीका है।

Wednesday, May 26, 2021

Difference Between Relative & Absolute Cell Reference (In Hindi) - Sunrise Computer

Difference Between Relative & Absolute Cell Reference

(In Hindi)

Relative Cell Reference

  1. यह एक सामान्य सेल रेफरेंस होता है बाय डिफॉल्ट जो भी सेल रेफरेंस या कैलकुलेशन होता है वह रिलेटिव चल रेफरेंस में होता है।

  2. इसमें रेफरेंस वाली वैल्यू को कॉपी करते हैं तो वह रो एंड कॉलम के पोजीशन के अकॉर्डिंग चेंज हो जाती है।

  3. यदि a1 में 1 तथा b1 में 2 लिखें  तथा c1 में दोनों का sum करके नीचे वाली cell में Paste करने का फार्मूला =a1+b1  से =a2+b2  हो जाता है।

  4. इसमें रो या कॉलम दोनों के रेफरेंस बदल जाते हैं।


Absolute Cell Reference 

  1. इस प्रकार के  सेल रेफरेंस में वैल्यू किसी भी स्टेज में चेंज नहीं होती है।

  2. इसमें रेफरेंस वाली वैल्यू को कॉपी करने पर सिम चालू ही अदर सेल पर पहुंच जाती है।

  3. इसमें कैलकुलेशन के लिए Cell Name को डॉलर सिंबल के साथ लिखते हैं और फॉर्मूला =$a$1+$b$1  को कॉपी करने पर Same Formula ही प्रत्येक जगह पेस्ट हो जाएगा।

  4. इसमें केवल रो या कॉलम के रेफरेंस को फिक्स किया जा सकता है।


Transmission Media in Hindi - Sunrise Computer

TRANSMISSION MEDIA Transmission Media सूचना को Sender से Receiver तक पहुँचाने का माध्यम Transmission Media कहलाता है। यह दो प्रकार का होता...