Saturday, May 22, 2021

5G Technology In Hindi - Sunrise Computer

How does work 5G Technology?

  • अब समय है मशीन लर्निंग का या अगर इसका एडवांस लेवल आप कहे तो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तेजी से विकसित हो रहा है। जिस में इंटरनेट की बहुत बड़ी सहभागिता है जब आप इंटरनेट पर कोई भी डाटा अपलोड करते हो यानी इनपुट कराते हो।
  • स्वचालित कारें भी एक दूसरे से बेहतर संवाद कर पाएंगी और यातायात और मैप्स से जुड़ा डेटा लाइव साझा कर पाएंगी।
  • 5G के दौरान बहुत ज्यादा बढ़ जाएगी यानि मशीनें आपस में तेजी कनेक्‍ट करने लगेंगी अभी कहीं ज्‍यादा स्‍मार्ट हो जायेंगी।
  • इसमें डेटा की रफ्तार 10 Gbps तक होगी।
  • ये Lower battery consumption करती है।
  • ये ज्यादा नंबर की Supporting Devices को Support करेगी।

5G टेक्नोलॉजी भारत में कब आएगा?
5G को समझने के लिए सबसे पहले में वायरलेस नेटवर्क को समझना होगा। असल में अभी 4G यानि Fourth-Generation (4G) Long-Term Evolution (LTE) Wireless Technology के भी सिग्नल हमारे पास आते हैं। वह सभी Radio Waves के माध्यम से प्राप्त होते हैं। इनको Transmit करने के लिए बड़े-बड़े Mobile Towers लगाए जाते हैं। वहीं 5G Wireless Signals को Transmit करने के लिए बहुत सारे छोटे Small Cell Stations बनायेंं जायेगेंं।

असल में 5G Wireless Broadband Technology का Spectrum 30 से 300 gigahertz (Ghz) के बीच होता है जिसे Millimeter wave या millimeter band कहा जाता है। अब चूंकि Millimeter Wave Spectrum में band of spectrum हमेशा 30 GHz से 300 GHz के भीतर ही होती है Millimeter Wave (MM Wave) केवल Short Distances में Transmit हो सकती हैं। जैसे Wifi काम करता है। 

तो इसके लिये हर जगह Millimeter Wave Antenna लगाने होगें, जिससे आपकी कोई डिवाइस इससे तुुरंत कनेक्‍ट हो जायेगी, इसके साथ एक परेशानी होगी जब आप तेजी से कहीं जा रहे होगें तब आपका फोन Millimeter Wave Antenna से के बाद तुरंत दूसरे Wave Antenna से कनेक्‍ट होगा।

कौन से देश हैं शामिल 5G की दौड मेंं ?
United States, Japan, South Korea और China इन चार देशों में 5G की मुख्य Development सबसे ज्यादा है, 5G Technology का सम्पूर्ण इस्तमाल 2020 से होने की उम्मीद की जा रही है।

5G के आने से बाद क्या बदलेगा?
भारत में अभी 4G पूर्णरूप से विकासित नहीं हुआ है। अगर बात करें तो भारत में 4G आया था तब पूरी तरह से सभी फ़ोन बदलना पड़ा था मोबाइल नेटवर्क में बढा बदलाव हुआ था हो सकता है। 5G के लिये भी ऐसा हो कभी कई कंपनियां इस तकनीक पर काम कर रही हैं, वहीं दुनिया कुछ देशों में 5G साल 2020 तक लॉन्च होने की संभावना है भारत में शायद यह तकनीक कुछ देर में आयेगी।

Tuesday, May 11, 2021

1G / 2G / 2.5G / 3G / 4G / 5G In Hindi (Detailed) - Sunrise Computer

1G / 2G / 2.5G / 3G / 4G / 5G In Hindi (Detailed)
1जी नेटवर्क क्या है, कब आया, किसके द्वारा बनाया गया है ?
यह मोबाइल नेटवर्क की सबसे पहली पीढ़ी थी। इसकी शुरूआत 1981 में USA द्वारा बनाया गया है। 1जी के माध्यम से केवल वॉयस कॉलिंग और मैसेजिंग का ही उपयोग होता था और यह सर्विस कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में ही उपलब्ध थी। यह एनालॉग सिग्नल पर आधारित तकनीक थी और तकनीक पर चलने वाले हैंडसेंट काफी भारी हुआ करते थे। 1जी तकनीक में मोबाइल फोन पर आवाज की क्वालिटी काफी खराब थी और यह बैटरी की बहुत खपत करता था। 1जी तकनीक में 2.4केबीपीएस तक की गति थी।

नुकसान
- औसल वॉयस क्वालिटी
- साधारण बैटरी लाइफ
- भारी भरकम फोन
- सिक्योर नहीं
- लिमिटेड क्षमता

2जी नेटवर्क क्या है, कब आया, किसके द्वारा बनाया गया ?
मोबाइल नेटवर्क की दूसरी पीढ़ी 2जी थी जो कि जीएसएम पर आधारित थी। 2जी की शुरूआत फिनलैंड में 1991 में हुई। इस तकनीक में पहली बार डिजिटल सिग्नल का उपयोग किया गया। इस तकनीक के माध्यम से फोन कॉल के अलावा पिक्चर मैसेज, टेक्स्ट मैसेज और मल्टीमीडिया मैसेज भेजे जाने लगे। इस तकनीक में 1जी के मुकाबले बैटरी की खपत कम होती थी। 2जी तकनीक में डाउनलोड और अपलोड की अधिकतक स्पीड 64केबीपीएस तक थी। इसके बाद इसके अडवांस वर्जन 2.5जी और 2.7जी भी बाजार में आए। जिसमें डाटा के आदान-प्रदान की गति पहले से और अधिक हो गई थी। साथ ही इसमें ईमेल सेंड और रिसीविंग के अलावा वेब ब्राउजिंग की सुविधा उपलब्ध थी।

2.5जी नेटवर्क क्या होता है?
इस टेक्नोलॉजी का प्रयोग 2जी टेक्नोलॉजी और 3जी टेक्नोलॉजी के बीच किया गया। इसके सेल्यूलर टेक्नोलॉजी को जीपीआरएस के साथ जोड़कर एक सक्षम नेटवर्क बनाया। जिसमे फोन कॉल्स, सेंड / रिसीव ईमेल मैसेजेस, वेब ब्राउजिंग, इत्यादि। इसकी स्पीड 64-144केबीपीएस होती थी, इसमें किसी 3 मिनट के एमपी3 ऑडियो को डाउनलोड करने के लिए लगभग 6-9 मिनट का समय लगता है।

लाभ
-टेक्स्ट मैसेज, पिक्चर मैसेज और एमएमएस सर्विस
- बेहतर क्वालिटी और क्षमता

नुकसान
- डाटा के लिए सही नहीं।
- वीडियो कॉलिंग और वीडियो स्ट्रीमिंग में परेशानी।

3जी नेटवर्क क्या है, कब आया, किसके द्वारा बनाया गया ?
मोबाइल नेटवर्क तकनीक तीसरी पीढ़ी 3जी को वर्ष 2000 में शुरू किया गया। इसमें डाटा की स्पीड बढ़कर 384केबीपीएस से 2एमबीपीएस के बीच हो गई। 3जी में वॉयस कॉल के साथ ही वीडियो कॉल का भी सुविधा उपलब्ध थी। वहीं इसमें फाइल ट्रांसफर, इंटरनेट, ऑनलाइन टीवी, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, 3डी गेमिंग और ईमेल सेंड-रिसीव जैसे फीचर शामिल थे। 2जी तकनीक के मुकाबले 3जी तकनीक की खासियत थी कि यह ​अधिक सुरक्षित है। 3जी तकनीक में अधिकतक डाउनलोड गति 21MBPS और अपलोड गति 5.7MBPS है। साथ ही इसके बड़ी खासियत है कि इसने मोबाइल फोन के लिए एप्लिकेशन बनाने के रास्ता खोल दिया।

फायदे
- सिक्योरिटी और उच्च स्पीड वेब सुविधा
- वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग
- टीवी स्ट्रीमिंग

नुकसान
- 3जी लाइसेंस सर्विस के लिए मंहगी फीस
- उच्च बैंडबिथ की आवश्यकता
- मंहगे 3जी फोन

4जी नेटवर्क क्या है, कब आया, किसके द्वारा बनाया गया ?
4जी तकनीक की शुरूआत साल 2007 में हुई लेकिन उस वक्त यह वाईमैक्स नेटवर्क पर टेस्ट किया गया था। वर्ष 2008 में 4जी की एलटीई तकनीक ने दस्तक दी भारत में भी 4जी LTE (Long Term Evolution) सेवा ही उपलब्ध है। 4जी मोबाइल तकनीक माध्यमम से 100MBPS से लेकर 1GBPS की गति से डाटा डाउनलोड और अपलोड किया जा सकता है। इसमें एक सामान्य मूवी कुछ ही सेकेंड में डाउनलोड हो जाती है। यह तकनीक ग्लोबल रोमिंग को सपोर्ट करती है और इसमें सिक्योरिटी फीचर्स भी अधिक हैं। 4जी तकनीक की सबसे बड़ी खूबी है कि यह खराब से खराब नेटवर्क पर भी कम से कम 54MBPS की गति देता है।
#LTE (Long Term Evolution)
इस मानक को 2009 में ओस्लो, नॉर्वे और स्टॉकहोम, स्वीडन में व्यावसायिक रूप से प्रयोग किया गया था।

फायदे
- मोबाइल मल्टीमीडिया
- ग्लोबल मोबिलिटी सपोर्ट
- हाई स्पीड

नुकसान
- बैटरी की अधिक खपत
- मुश्किल हार्डवेयर

5जी नेटवर्क क्या है, कब आया, किसके द्वारा बनाया गया ? 
यह मोबाइल नेटवर्क की सबसे आधुनिक तकनीक है। पिछले साल साउथ कोरिया ने 5जी तकनीक की शुरुआत की है। यह वायरलैस वर्ल्ड वाइड वेव को ध्यान में रखकर पेश किया गया है। यह पूरी तरह वायरलैस कम्यूनिकेशन है जिसमें लिमिटेशन लगभग न के बराबर है। इस तकनीक में बड़ें पैमाने पर डाटा का आदान-प्रदान होता है। 5जी तकनीक की भारत में इसकी स्पीड अधिकतम् 10जीबीपीएस है।

लाभ
-इसमें मल्टीमीडिया न्यूजपेपर
- एचडी क्वालिटी टीवी प्रोग्राम
- पिछली जेनरेशन के बजाय तीव्र डाटा ट्रांसमिशन
- अधिक फोन मैमोरी
- ऑडियो और वीडियो कॉलिंग में स्पष्टता

एमबीपीएस क्या होता है?
इंटरनेट पर डाटा ट्रांस्फर की गति को मेगा​बिट्स प्रति सेकेंड के दर से मापा जाता है। 1 मेगाबिट्स में एक लाख बिट्स होते हैं।

वाईमैक्स क्या है ?
यह एक दूरसंचार तकनीक है। वाईमैक्स का पूरा नाम वर्ल्डवाइड इंटरऑपरेटिबिलिटी फॉर माइक्रोवेव एक्सेस है। इसे साउथ कोरिया द्वारा 2006 में विकसित किया गया था। यह मोबाइल सेवा की वायरलेस तकनीक है। 4जी नेटवर्क की यह तकनीक न्यूनतम 30-40 एमबीपीएस तक की गति से डाटा ट्रांस्फर में सक्षम है। वाईमैक्स ऐसे लोगों के लिए अधिक उपयोगी है जो घर और ऑफिस दोनों जगह इंटरनेट का उपयोग करते हैं किंतु कनेक्शन एक ​ही लेना चाहते हैं। भारत में 4जी की यह सेवा उपलब्ध नहीं है।

Friday, May 7, 2021

OSI Model

OSI मॉडल क्या है?
(OSI Model in Hindi)

OSI का तात्पर्य Open System Interconnection है OSI रिफरेन्स मॉडल Data Communication का एक स्टैंडर्ड्स मॉडल है जिसके द्वारा नेटवर्क में Data Transmission के समय, कंप्यूटरों के हार्डवेयर और सॉफ्टवेर में होने वाले Changes एवम् फंक्शन को 7 लेयर में डिफाइन किया गया है।

"जब नेटवर्क में कंप्यूटर के मध्य डाटा ट्रांसमिशन होता है तो डाटा ट्रांसमिशन के प्रोसेस में कंप्यूटर द्वारा कई प्रकार के फंक्शन परफॉर्म किये जाते है जिसे OSI ने सात लेयर में डिफाइन किया है अर्थात, OSI रिफरेन्स मॉडल 7 लेयर का एक Framework है जिसके द्वारा नेटवर्क में कंप्यूटर और डिवाइसों के मध्य डाटा ट्रांसमिशन के समय होने वाले फंक्शन को सात लेयर में डिफाइन किया गया है।"

Open Interconnection का तात्पर्य एक ऐसा नेटवर्क कनेक्शन से है जिसमें विभिन्न कंपनीयों द्वारा बनाये जाने वाले कंप्यूटरों और नेटवर्क डिवाइसों को आपस में Interconnect किया जा सके अर्थात एक ही नेटवर्क में सभी को Connect किया जा सके।

वास्तव में OSI, ओपन इंटरकनेक्शन का एक स्टैण्डर्ड मॉडल है जो नेटवर्क कम्युनिकेशन के लिए एक इंटरनेशनल स्टैण्डर्ड बन चूका है क्योकिं विभिन्न प्रकारों के नेटवर्क डिवाइसों को बनाने वाले सभी निर्माता कंपनीयां अपने प्रोडक्ट को बनाते समय OSI रिफ़रेंस मॉडल का अनुपालन करता है।

Application Support Block
Application Support Block का कार्य नेटवर्क में Communicate करने वाले डिवाइसों के सॉफ्टवेर प्रोग्राम को नेटवर्क से Connect करने के लिए होता है। इस ब्लॉक के अंदर तीन लेयर Application Layer, Presentation Layer और Session Layer आते है।

Network Support Block
Network Support Block नेटवर्क में Data को Move करने के लिए Responsible होता है इसके अंतर्गत OSI मॉडल के 4 लोवर लेयर Transport, Network, Data Link और Physical Layer आते है।

OSI Reference Model के लेयर
OSI रिफरेन्स मॉडल 7 लेयर का एक Framework है जिसके द्वारा नेटवर्क में कंप्यूटर और डिवाइसों के मध्य डाटा ट्रांसमिशन के समय होने वाले फंक्शन को सात लेयर में डिफाइन किया गया है जो निम्नलिखित है:-
              

1. Physical Layer in OSI Model
यह OSI मॉडल का पहला लेयर है जो पूरी तरह से हार्डवेयर से सम्बंधित है इसका मुख्य कार्य डाटा को बिट के रूप में ट्रांसमिट करना होता है। नेटवर्क में एक नोड से दुसरे नोड में ट्रांसमिट होने वाले बिट के ट्रांसमिशन के लिए Responsible होता है।

Physical Layer के Function
फिजिकल लेयर विभिन्न प्रकार के फंक्शन के लिए Responsible होता है जो निम्नलिखित है: –
- Data को Binary bit के रूप में Represent एवम् ट्रांसमिट करना।
- Bit को सिंक्रोनाइज करने का कार्य।
- Device के Function और Procedure को डिफाइन करना।
- ओ एस आई मॉडल के इस लेयर में केबल और विभिन्न प्रकार के डिवाइस जैसे: – हब, स्विच, मॉडेम, ब्रिज इत्यादि।

2. Data Link Layer in OSI Model
यह OSI मॉडल का दूसरा लेयर है जो नेटवर्क में एक नोड से दुसरे नोड तक डाटा को फ्रेम के रूप में ट्रांसमिशन के लिए Responsible होता है। यह लेयर Node to Node Delivery के लिए जिम्मेदार होता है।

Data Link Layer के Function
फिजिकल लेयर विभिन्न प्रकार के फंक्शन के लिए Responsible होता है जो निम्नलिखित है:-
- Framing
- Physical Addressing
- Flow Control
- Error Control
- Access control

3. Network Layer in OSI Model
यह OSI मॉडल का तीसरा लेयर है जो Source से Destination तक डाटा पैकेट को ट्रांसमिट करने के लिए Responsible होता है। नेटवर्क लेयर का अन्य कार्य डाटा पैकेट की एड्रेसिंग तथा उसके लिए बेस्ट पाथ का निर्धारण करना है। नेटवर्क लेयर में मुख्य रूप से राउटर काम करता है जो डाटा पैकेट के पाथ का निर्धारण करता है। नेटवर्क लेयर Source to Destination Delivery के लिए Responsible होता है।

Network Layer के Function
नेटवर्क लेयर विभिन्न प्रकार के फंक्शन के लिए Responsible होता है जो निम्नलिखित है:-
- Logical Addressing (IP Addressing)
- Routing Algorithm
- Best Path का selection करना।

नेटवर्क लेयर के प्रोटोकॉल
- नेटवर्क लेयर में मुख्य रूप से IP (Internet Protocol) कार्य करते है।

4. Transport Layer in OSI Model
यह OSI मॉडल का तीसरा लेयर है जो Source से Destination तक डाटा पैकेट को ट्रांसमिट करने के लिए Responsible होता है। नेटवर्क लेयर का अन्य कार्य डाटा पैकेट की एड्रेसिंग तथा उसके लिए बेस्ट पाथ का निर्धारण करना है। नेटवर्क लेयर में मुख्य रूप से राउटर काम करता है जो डाटा पैकेट के पाथ का निर्धारण करता है। नेटवर्क लेयर Source to Destination Delivery के लिए Responsible होता है। 

Transport Layer के function
ट्रांसपोर्ट लेयर के द्वारा विभिन्न प्रकार के फंक्शन परफॉर्म किया जाता है जो निम्नलिखित है:-
- Segmentation (डाटा को सेगमेंट में बाँटना)
- Re-sequencing & Re-transmit
- Error Control
- Flow Control

Transport Layer के Protocol
ट्रांसपोर्ट लेयर में दो प्रोटोकॉल TCP (Transmission Control Protocol) और UDP (User Data Protocol) कार्य करते है।

5. Session Layer in OSI Model
यह OSI मॉडल का पांचवां लेयर है जो डिवाइसों के बिच होने वाले कनेक्शन के लिए Responsible होता है दुसरे शब्दों में सेशन लेयर का मुख्य कार्य डिवाइसों के बिच में होने वाले कनेक्शन को कण्ट्रोल करने के लिए किया जाता है। सेशन लेयर Dialog Control और Synchronization के लिए Responsible होता है।

Session Layer के Function
सेशन लेयर के द्वारा विभिन्न प्रकार के फंक्शन परफॉर्म किया जाता है जो निम्नलिखित है:-
- कम्युनिकेशन के लिए Connection Establish करना।
- कम्युनिकेशन के लिए Connection चालू रखना।
- कम्युनिकेशन होने के बाद Connection बंद करना।
- Dialog Control
- Synchronization

6. Presentation Layer in OSI Model
यह ओ एस आई मॉडल का छटवां लेयर है जो डाटा कन्वर्शन, डाटा कम्प्रेशन, इन्क्रिप्शन/डिक्रिप्शन के लिए Responsible होता है। प्रेजेंटेशन लेयर का मुख्य कार्य नेटवर्क में डिवाइसों के मध्य होने वाले ट्रांसमिशन में डाटा के फॉर्मेट को नियंत्रण करना होता है इस लेयर में डाटा को एनकोड तथा डिकोड भी किया जाता है साथ ही डाटा को Encrypt एवम् Decrypt भी किया जाता है।

उदाहरण:- जब दो अलग अलग ऑपरेटिंग सिस्टम एवम् एप्लीकेशन वाले डिवाइसों के बिच कम्युनिकेशन होता है तो उस स्थिति में डाटा का फॉर्मेट अलग अलग हो सकता है इस स्थिति में प्रेजेंटेशन लेयर के माध्यम से डाटा ट्रांसलेट होता है।

Presentation layer के Function
प्रेजेंटेशन लेयर के द्वारा विभिन्न प्रकार के फंक्शन को परफॉर्म किया जाता है जो निम्नलिखित है:-
- Data Translation (डाटा का ट्रांसलेशन करना)
- Data Encryption/Decryption
- Data Compression

7. Application Layer on OSI Model
एप्लीकेशन लेयर OSI मॉडल का सबसे उपरी लेयर है जिसका मुख्य कार्य नेटवर्क सर्विसेस को एक्सेस करने के लिए एप्लीकेशन प्रोग्राम को Enable करना होता है। एप्लीकेशन लेयर के माध्यम से प्रोग्राम नेटवर्क सर्विस तथा उसके रिसोर्स को एक्सेस करता है। दुसरे शब्दों में एप्लीकेशन लेयर Network Services और Application के बिच में इंटरफ़ेस का कार्य करता है।

उदाहरण:- एप्लीकेशन लेयर का उदाहरण ब्राउज़र, जिसका उपयोग यूजर इन्टरनेट या नेटवर्क को एक्सेस करने के लिए करता है।

Application Layer के Function
एप्लीकेशन लेयर के द्वारा विभिन्न प्रकार के फंक्शन को परफॉर्म किया जाता है जो निम्नलिखित है:-
- File Transfer
- File Access & Management
- Directory Services
- Network Access (Authentication)
- Mail Services
- Virtual Terminal

Application Layer के Protocol
Application Layer में विभिन्न प्रकार के प्रोटोकॉल कार्य करते है जैसे HTTP (Hyper Text Transfer Protocol), FTP( File Transfer Protocol), SMTP ( Simple Mail Transfer Protocol), DNS (Domain Name System) इत्यादि।

Thursday, May 6, 2021

Network Devices

Network Device क्या है?
वे सभी Device जिनके help से Network को create किया जाता है उन सभी डिवाइस को Network Device कहा जाता है। नेटवर्क डिवाइस के मदद से नेटवर्क के Size को Increase किया जाता है। नेटवर्क डिवाइस को ही Inter Networking Device या Connecting Device भी कहा जाता है।

Example of Network Device:- Repeater, Hub, Switch, Router, NIC, Modem, Multiplexer, DSL, Bridge, Amplifier और Gateway इत्यादि।

Types of Network Device
HUB
Repeater
Modem
Switch
Router
NIC
Multiplexer
DSL
Amplifier
Gateway

1. What is HUB in Hindi?
HUB एक Network Device है। जिनका उपयोग Network में Computer की संख्या को बढानें के लिए किया जाता है। Network के Size को Increase करने के लिए भी HUB का प्रयोग किया जाता है। HUB के माध्यम से Network में Multiple Port को available कराया जाता है। जिनके द्वारा नेटवर्क में विभिन्न डिवाइस को connect किया जाता है।

Types of HUB (हब के प्रकार)
HUB को दो Category में बाँटा गया है। पहला ACTIVE HUB और दुसरा PASSIVE HUB.

ACTIVE HUB:- इस प्रकार के HUB का उपयोग केवल कनेक्टर के रूप में किया जाता है। यह Signal को Regenerate नहीं कर सकता है।

PASSIVE HUB:- इस प्रकार के HUB का उपयोग Multi port एवम Signal को Regenerate करने के लिए किया जाता है। इसका उपयोग Reapeter के रूप में भी किया जाता है।

Advantage of HUB
- नेटवर्क के साइज़ को बढ़ाने में Help करता है।
- हब के उपयोग से नेटवर्क के परफॉरमेंस में कोई फर्क नहीं पड़ता है।
- हब विभिन्न प्रकार के Network media को सपोर्ट करता है।

Disadvantage of HUB
- हब Network Traffic को फ़िल्टर नहीं कर सकता है।
- हब नेटवर्क के best path का Selection नहीं कर सकता है।
- अलग अलग प्रकार के Network Architecture को connect नहीं कर सकता है।
- Network को Segment में Divide नहीं कर सकता है।
- नेटवर्क ट्रैफिक को Reduce नहीं कर सकता है।

2. What is Repeater in Hindi?
Repeater एक नेटवर्क डिवाइस है। जिनका उपयोग Digital Signal को Regenerate करने के लिए किया जाता है। जब नेटवर्क में ट्रांसमिशन लम्बी दुरी में किया जाता है तो सिग्नल Week होने लगते है उस समय Repeater का उपयोग सिग्नल को Regenerate करके ट्रांसमिशन करने के लिए किया जाता है जिससे लम्बी दुरी में ट्रांसमिशन Successfully हो जाता है।

Repeater एक Intelligent डिवाइस है जो Signal को Regenerate करने के साथ साथ Signal में उपस्थित Noise और Error को भी Solve करता है। Repeater अलग-अलग प्रकार के Network Media के साथ कार्य कर सकता है। कई प्रकार के Hub एवम् Switch में भी Repeater को inbuilt किया जाता है।

Repeater एक नेटवर्क डिवाइस है जो सिग्नल को रिसीव करता है और Week सिग्नल को Regenerate करके आगे ट्रांसमिट कर देता है। रिपीटर OSI Model के फिजिकल लेयर पर कार्य करता है। नेटवर्क में जितने ज्यादा रिपीटर का उपयोग किया जायेगा उस नेटवर्क का सिग्नल उतना ही ज्यादा Strong होगा और लम्बी दुरी तक ट्रांसमिट किया जा सकता है।

वर्तमान में आने वाले आधुनिक रिपीटर में HUB और Switch इनबिल्ट होते है अतः यह हब और स्विच दोनों का भी कार्य कर सकता है। Repeater को एक इंटेलीजेंट डिवाइस माना जाता है क्योकिं यह ट्रांसमिट होने वाले डाटा पैकेट के Noise और Error को रिपेयर कर देता है।

Advantage of Repeater
1. रिपीटर के माध्यम से सिग्नल को Regenerate करके लम्बी दुरी तक ट्रांसमिट किया जा सकता है।
2. Repeater एक Intelligent डिवाइस है यह सिग्नल को Regenerate करने के साथ साथ सिग्नल में उपस्थित Noise और Error को भी Repair करता है।
3. रिपीटर एक Simple Device है अतः इसके उपयोग करने के लिए टेक्निकल स्किल की जरुरत नहीं होती है।
4. रिपीटर की कीमत ज्यादा नहीं होती है अतः इस नेटवर्क में उपयोग करने से नेटवर्क की Cost में ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है।
5. रिपीटर वायर्ड और वायरलेस दोनों प्रकार के आते है अतः यूजर अपने सुविधा के अनुरूप उपयोग कर सकता है।
6. रिपीटर का उपयोग करके नेटवर्क के साइज़ को बड़ा करने पर उसके परफॉरमेंस में कोई फर्क नहीं पड़ता है।
7. रिपीटर अलग अलग प्रकार के मीडिया से कनेक्ट होकर कार्य कर सकता है जैसे ट्विस्टेड पेअर केबल , कोएक्सीयल केबल, फाइबर ऑप्टिक्स इत्यादि।

Disadvantage of Repeater
1. Repeater में नेटवर्क को मॉनिटर करने एवम् उनको ठीक करने की फंक्शन नहीं होती है।
2. रिपीटर का उपयोग केवल डिजिटल सिग्नल के लिए किया जाता है यह एनालॉग सिग्नल के लिए कार्य नहीं करता है।
3. Repeater का उपयोग करके दो अलग-अलग LAN को कनेक्ट नहीं किया जा सकता है इसके द्वारा केवल एक ही LAN के अलग-अलग सिग्मेंट को जोड़ा जा सकता है।
4. Repeater नेटवर्क के ट्रैफिक को फ़िल्टर नहीं कर सकता है।
5. Repeater केवल एक ही प्रकार के प्रोटोकॉल पर कार्य कर सकता है।

3. What is Modem in Hindi ?

मॉडेम एक उपकरण या प्रोग्राम है जो कंप्यूटर को डेटा को संचारित करने में सक्षम बनाता है उदाहरण के लिए, टेलीफोन या केबल लाइन। यह एक प्रकार का हार्डवेयर डिवाइस है जो एनालॉग और डिजिटल डेटा के बीच वास्तविक समय में दो-तरफा नेटवर्क संचार के लिए परिवर्तित होता है। यह कंप्यूटर या राउटर को ब्रॉडबैंड नेटवर्क से जोड़ता है। एक मोडेम की गति बीपीएस (bps) और केबीपीएस( Kbps) में मापा जाता है।

कंप्यूटर मॉडेम के प्रकार-

  • Onboard Modem :
  • Onboard Modem मदरबोर्ड पर निर्मित मॉडेम है, इस मोडेम को हटाया नहीं जा सकता है, लेकिन एक जम्पर (Jumper)या सीएमओएस(CMOS Setup) सेटअप के माध्यम से अक्षम किया जा सकता है।

  • Internal Modem :
  • मोडेम जो एक पुराने कंप्यूटर पर एक नए डेस्कटॉप कंप्यूटर या ISA स्लॉट के अंदर PCI स्लॉट से कनेक्ट होता है इस दस्तावेज़ की शुरुआत में दिखाए गए आंतरिक मोडेम एक पीसीआई मॉडेम का एक उदाहरण है।

  • External Modem :
  • एक बॉक्स के भीतर मोडेम जिसे बाहरी रूप से कंप्यूटर से जोड़ता है, आमतौर पर सीरियल पोर्ट या यूएसबी पोर्ट। चित्र बाहरी यूएसआरोबॉटिक्स मोडेम का एक उदाहरण है।

  • Removable Modem :
  • मोडेम पुराने लैपटॉप PCMCIA स्लॉट के साथ प्रयोग किया जाता है और जरूरत के अनुसार इसे जोड़ा या हटाया जा सकता है।

    PCMCIA :- Personal Computer Memory Card International Association

4. What is Switch?


5. Router
6. NIC
7. Multiplexer
8. DSL
9. Amplifier
10. Bridge
11. Gateway


नेटवर्क क्या है ? (What is Network in hindi) - Sunrise Computer

नेटवर्क क्या है ? (What is Network in hindi)

नेटवर्क विभिन्न कम्प्यूटरों का एक समूह है जो एक-दूसरे से जुड़े रहते है, ये कम्प्यूटरों का एक-दूसरे से संचार स्थापित करने, सूचनाओं को सांझा करने का एक माध्यम है। किसी भी नेटवर्क को स्थापित करने के लिए प्रेषक, प्राप्तकर्ता, माध्यम और प्रोटोकॉल की जरूरत होती है। सरल शब्दों में बहुत से कम्प्यूटरों के आपस में जुड़ना कंप्यूटर नेटवर्किंग कहलाता है।

नेटवर्क स्थापित करने के मुख्य उपकरण निम्नलिखित है –

रिपीटर्स (Repeaters)
हब (Hub)
स्विच (Switch)
राउटर (Router)
गेटवे (Gateways)

नेटवर्क के प्रकार (Types of Network in hindi) –

LAN (Local Area Network)
LAN लोकल एरिया नेटवर्क एक कंप्यूटर नेटवर्क है। जिसके अंदर छोटे भौगोलिक क्षेत्र सम्मिलित होते है जैसे – घर, ऑफिस, भवनों का छोटा समूह, हवाई अड्डा आदि। LAN लोकल एरिया नेटवर्क आकार में बहुत छोटा होता है परन्तु इसके डेटा की संचार गति तीव्र होती है और यह नेटवर्क लैन ईथरनेट तकनीकी पर आधारित होता है। ये नेटवर्क दो कम्प्यूटरों के मध्य भी बन सकता है और इसमें लगभग 50 कंप्यूटर जुड़ सकते है। वर्तमान में LAN वायरलेस भी जुड़ रहें हैं इसका उपयोग डॉक्यूमेंट शेयरिंग के लिए भी करते है। LAN को स्थापित और संचालित करना आसान होता है। LAN से जुड़े कम्प्यूटरों के मध्य डेटा बहुत तेजी से ट्रांसफर होता है। LAN एक लोकल नेटवर्क है इसीलिए इसको स्थानीय क्षेत्र नेटवर्क के लिए अधिक सुरक्षित माना जाता है।

WAN (Wide Area Network) 
WAN वाइड एरिया नेटवर्क में कंप्यूटर आपस में लीड्ज लाइन या स्विचड सर्किट के माध्यम से जुड़े रहते है। इस नेटवर्क में बहुत बड़े भौगोलिक क्षेत्र सम्मिलित होते है जिसमे विभिन्न देश, महादेश आदि आते है। इंटरनेट, बैंकों द्वारा प्रदत्त ATM सुविधा और भारत में CMC द्वारा विकसित इंडोनेट (WAN) वाइड एरिया नेटवर्क के एक अच्छे उदाहरण है। WAN दुनिया के बहुत बड़े क्षेत्रों को कवर कर सकता है इसके माध्यम से सभी कम्पनियां एक दूसरे के साथ अपनी शाखाएं सांझा कर सकती है।

MAN (Metropolitan Area Network) 
MAN मेट्रोपोलिटन एरिया नेटवर्क दो या दो से अधिक लोकल एरिया नेटवर्क को जोड़ने का कार्य करता है। राउटर्स, स्विच, और हब मिलकर एक MAN (मेट्रोपोलिन एरिया नेटवर्क) का निर्माण करते है। यह नेटवर्क शहर के सीमाओं के भीतर स्थित विभिन्न कम्प्यूटरों का नेटवर्क है।

WLAN (Wireless Local Area Network) 
यह LAN के सामान ही एक स्थानीय क्षेत्र का नेटवर्क है जिसमें इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के मध्य कनेक्शन स्थापित करने के लिए Wireless technology जैसे की WiFi और Bluetooth का उपयोग किया जाता है। WLAN में कम्प्यूटरों को कनेक्ट करने के लिए किसी भी केबल की जरूरत नहीं होती है। यह छोटी संस्थाओं जैसे ऑफिसों और स्कूलों में उपयोग में लाई जाती है।

PAN (Personal Area Network)
यह एक कंप्यूटर नेटवर्क है जो एक व्यक्ति के कार्यक्षेत्र पर केंद्रित इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को जोड़ता है। PAN पर्सनल कंप्यूटर, टेबलेट, स्मार्टफोन आदि व्यक्तिगत डिजिटल सहायक जैसे सभी उपकरणों के बीच डेटा ट्रांसमिशन प्रदान करता है जिसके लिए वायर और केबल की जरूरत नहीं होती है। PAN एक सुरक्षित और विश्वसनीय नेटवर्क है जिसे पर्सनल डिवाइस को आपस में कम्युनिकेट करने के लिए उपयोग किया जाता है।

CAN (Campus Area Network)
CAN एक सीमित भौगोलिक क्षेत्र में कईं LAN यानि लोकल एरिया नेटवर्क को आपस में कनेक्ट करता है जिसे कॉर्पोरेट क्षेत्र नेटवर्क के रूप में भी जाना जाता है। CAN एक सिमित क्षेत्र तक ही सिमित होता है जो मल्टीपल LAN से निर्मित या बना होता है। यह WAN और MAN से अपेक्षाकृत छोटा होता है।

Wednesday, May 5, 2021

Element of Web (WWW) - Sunrise Computer

Element of Web (WWW)

1. Cyber Space :- साइबर स्पेस एक ऐसा वर्चुअल स्टोरेज होता है जो इंटरनेट की सभी जानकारी स्टोर करता है। इसे सर्वर के द्वारा एक्सेस किया जाता है। इसमें अनलिमिटेड डाटा स्टोरेज की छमता होती है। इसे ओवर द वर्ल्ड वाइड कही से भी प्रयोग किया जा सकता है।
2. Server:- सर्वर एक नेटवर्क कंप्यूटर या नेटवर्क का एक्सेस प्वाइंट होता है। जो यूजर रिक्वेस्ट के अनुसार साइबर स्पेस से इनफॉर्मेशन एक्सेस कराता है। सर्वर कई प्रकार के होते है, अतः प्रत्येक कार्य के लिए अलग-अलग सर्वर रिस्पॉन्सिबल होता है।
3. Workstation :- वर्क स्टेशन सर्वर के पास मौजूद एक स्पेशल मेनफ्रेम कंप्यूटर होता है जो साइबर स्पेस से प्राप्त जानकारी सर्वर के लिए स्टोर करता है। जिससे कि जरूरत पड़ने पर उसे क्लाइंट को दे सके। यह बहुत पावरफुल कंप्यूटर होता है। इसमें नेटवर्क ऑपरेटिंग सिस्टम इंस्टॉल करना होता हैं। 
4. Host :- होस्ट एक प्रकार का लोकल सर्वर या नेटवर्क कंप्यूटर होता है। जो किसी पार्टिकुलर एरिया के क्लाइंट को इंटरनेट सर्विस से जोड़ता है, तथा उनकी रिक्वायरमेंट को फुलफिल करता है। होस्ट मेन सर्वर से ऐड होकर क्लाइंट की रिक्वेस्ट को फुलफिल करता है।
5. Client / Node / Terminal :- क्लाइंट कंप्यूटर नेटवर्क से जुड़ा ऐसा कंप्यूटर होता है जो सर्वर से इनफॉर्मेशन रिक्वेस्ट करता है इस कंप्यूटर सिस्टम में कोई भी ऑपरेटिंग सिस्टम हो सकता है। किसी कंप्यूटर को क्लाइंट बनाने के लिए उसे नेटवर्क से कनेक्ट होना आवश्यक है।
**नोट:- 
1. नोड भी एक नेटवर्क कंप्यूटर है जो दूसरे कंप्यूटर के लिए कार्य करता है। जैसे बैंकिंग नोड, नोड का प्रयोग प्रायः कोलेबोरेटिंग कम्प्यूटिंग में किया जाता है।
2. टर्मिनल नेटवर्क से जुड़ा नेटवर्क एक्सेस प्वाइंट है जो दूसरे सीपीयू के लिए कार्य करता है। एक टर्मिनल में माउस, कीबोर्ड व मॉनिटर होता है।
3. किसी नेटवर्क में जुड़े अंतिम टर्मिनल को डम्ब टर्मिनल कहते है क्योंकि यह दूसरे से कम्युनिकेट नही कर सकता है, सिर्फ इनफॉर्मेशन को रिसीव कर सकता है।
6. Uniform Resource Locator (URL) :- यूआरएल एक कंप्लीट वेब एड्रेस होता है जिसे वर्ल्ड वाइड वेब में किसी इनफॉर्मेशन को डायरेक्ट एक्सेस करने के लिए प्रयोग किया जाता है। यह एक प्रकार का टेक्स्ट एग्जिट होता हैं जो किसी इनफॉर्मेशन को यूनिकली आइडेंटिफाई करता है। एक यूआरएल में अनेकों डायरेक्टरीज तथा प्रोटोकॉल्स पाए जाते है।
7. Website :- वेबसाइट वेबपेजेस का समूह होता है जिसमें सभी वेब पेजेस हाइपरलिंक के माध्यम से एक दूसरे से जुड़े होते है। वेबसाइट हमेशा  किसी एक ऑब्जेक्टिव के लिए नहीं बनाई जाती है जो किसी व्यक्ति विशेष, संस्था या इनफॉर्मेशन को प्रस्तुत करती है।
उदाहरण - www.Google.com , www.SunriseComputer.com, www.sarkariresult.com, etc
8. WebPages :- वेबपेज किसी वेबसाइट का एक सिंगल पेज होता है जो ASCII तथा NON -ASCII इनफॉर्मेशन को होल्ड कर सकता है। जो वेबसाइट कि कुछ इनफॉर्मेशन होती है यदि वेब पेज ASCII इनफॉर्मेशन होल्ड करता है तो वह स्टैटिक वेबसाइट होती है, जबकि नॉन ASCII इनफॉर्मेशन होल्ड करने पर वेबसाइट निश्चित रूप से डायनेमिक होती है।
9. Netiquette (नेटीक्वेट) :- नेटीक्वेट का पूरा नाम नेट एटीकेटी अथवा इंटरनेट एटीकेटी होता है। यह ऑनलाइन व्यवहार के नियमों का संकलन है सभी नेटीजेन के लिए समान रूप से लागू होता है। इंटरनेट में हम अनुशासित भाषा, संयमित आचरण और दूसरों के प्रति कृतज्ञता रखते हुए उपयोग करेंगे तो हम एक बेहतर नेटीजन बन सकते है।
#Netigen:- इंटरनेट को प्रयोग करने वाले व्यक्तियों को नेटीजन कहा जाता है। उनकी विचार धारा उन्हें गुड नेटीजन और बैड नेटीजन बनाती है।


Merit & Demerit of Internet - Sunrise Computer

MERIT OF INTERNET (इंटरनेट के फायदे)

1. Information Hub (इनफॉर्मेशन हब)
इंटरनेट कई इनफॉर्मेशन का सूचना संग्रह होता है। जहां से किसी भी प्रकार की इनफॉर्मेशन को एक्सेस करना ही सरल होता है।
2. Easy to Access (आसानी से प्रयोग)
इंटरनेट से भी किसी प्रकार की इनफॉर्मेशन को एक्सेस करना ईजी होता है। क्योंकि सर्च इंजन पर किसी भी इनफॉर्मेशन एक्सेस करने के लिए स्पेसिफिक URL (Uniform Resource Locator) की जरूरत नहीं होती है।
3. Communication Backbone
इंटरनेट का मुख्य उद्देश्य दो - या - दो से यूजर के बीच कम्यूनिकेशन प्रोवाइड करना होता है। जिसके प्रयोग से पूरे विश्व में डाटा शेयरिंग, कम्यूनिकेशन फैसिलिटी प्रोवाइड होती है।
4. Resource Sharing (रिसोर्स शेयरिंग)
इंटरनेट के प्रयोग से यूजर एक रिसोर्स को कई कंप्यूटर में शेयर कर सकता है। यह इंटरनेट की सबसे पॉपुलर सर्विस होती है।
5. Cost Effective (मूल्य पर प्रभाव)
रिसोर्स शेयरिंग के कारण किसी भी एक डिवाइस को नेटवर्क में शेयर किया जा सकता है। जिससे नेटवर्क में होने वाले एक्सपेंस से यूजर बच सकता है।

Demerit of Internet (इंटरनेट के नुकसान)

1. Complex Network (जटिल नेटवर्क)
इंटरनेट एक बहुत ही कॉम्प्लेक्स नेटवर्क होता है क्योंकि इसमें विश्व में बहुत से छोटे छोटे नेटवर्क जुड़े होते है इसलिए किसी पार्टिकुलर नेटवर्क को पहचानना कठिन होता है।
2. Difficult to Find Error (नेटवर्क में त्रुटि को खोजना)
इंटरनेट एक बहुत ही बड़ा एक नेटवर्क होता है जिसमे Error (त्रुटि) को खोजना काफी कठिन होता है।
3. No Restriction For Any Work (बिना किसी बंधन के कोई भी कार्य कर सकना)
इंटरनेट से किसी भी प्रकार की इनफॉर्मेशन को सर्च करना बहुत आसान होता है जो नेटीजन के लिए खराब सर्विस होने के साथ साथ गुड नेटीजन के लिए भी खराब सर्विस भी है, जिससे कि साइबर क्राइम होने के अधिक चांस होते है।
4. Information Overlapping
इंटरनेट एक बहुत बड़ा नेटवर्क होता है जहां पर सभी प्रकार की इनफॉर्मेशन एक ही जगह पर स्टोर होती है। सर्वर पर अधिक इनफॉर्मेशन होने के कारण यूजर की इनफॉर्मेशन ओवरलैप्ड हो जाती है।
5. Costly Setup (महंगा सेटअप)
नेटवर्क बिछाने के लिए अलग अलग डिवाइसेज का प्रयोग करना होता है क्योंकि नेटवर्क का सेटअप बहुत ही कॉस्टली पड़ता है क्योंकि नेटवर्क में जुड़ने के लिए कई नेटवर्क डिवाइस का प्रयोग किया जाता है।

नोट्स - इंटरनेट को किसी एक व्यक्ति द्वारा संचालित नही किया जाता है।

Transmission Media in Hindi - Sunrise Computer

TRANSMISSION MEDIA Transmission Media सूचना को Sender से Receiver तक पहुँचाने का माध्यम Transmission Media कहलाता है। यह दो प्रकार का होता...